भावनगर में आयोजित हुआ रीजनल बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी कॉन्क्लेव
बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में उद्योग की व्यापक संभावनाएं : जी.एस.बी.टी.एम. के मिशन डायरेक्टर श्री दिग्विजयसिंह जाडेजा
गुजरात की ₹1.07 लाख करोड़ की बायो इकॉनमी, देश में चौथे स्थान पर
रीजनल बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने बायोटेक क्षेत्र के अवसरों पर मार्गदर्शन दिया
सूचना ब्यूरो, भावनगर
गुजरात राज्य बायोटेक्नोलॉजी मिशन (GSBTM) द्वारा आज भावनगर के होटल सरोवर प्रीमियर में रीजनल बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इस कॉन्क्लेव में भावनगर के उद्योग जगत के अग्रणी उद्यमियों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने भाग लिया और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र के विस्तार, अवसरों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
इस अवसर पर जी.एस.बी.टी.एम. के मिशन डायरेक्टर श्री दिग्विजयसिंह जाडेजा ने कहा कि इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य स्थानीय उद्योगों को पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर भविष्य की तकनीकों जैसे कि बायोटेक्नोलॉजी में सरकारी प्रोत्साहनों और वैश्विक बाजार की मांग से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि आईटी की तरह ही बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं हैं और इसका भविष्य उज्ज्वल है। इसलिए भावनगर के उद्योगपति और शोधरत विद्यार्थी इस पॉलिसी की जानकारी लेकर आगे बढ़ें और देश के विकास में योगदान दें। उन्होंने उद्योग जगत से बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी का लाभ उठाने की अपील की।
श्री जाडेजा ने बताया कि वर्तमान में विश्व की बायो इकॉनमी ₹332 लाख करोड़ की है, जबकि भारत की बायो इकॉनमी ₹13.76 लाख करोड़ की है, जो देश के जीडीपी में 4.25% का योगदान देती है। गुजरात की बायो इकॉनमी ₹1.07 लाख करोड़ की है, जो देश में चौथे स्थान पर है और राष्ट्रीय बायो इकॉनमी में इसका 7.8% हिस्सा है। उन्होंने यह भी बताया कि ₹100 करोड़ के निवेश पर सरकार पांच वर्षों में लगभग ₹85 करोड़ की विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान करती है, जिसमें पूंजी सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी और परिचालन सब्सिडी शामिल हैं। उन्होंने गुजरात बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी 2022–27, रिसर्च सपोर्ट और ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट की जानकारी भी साझा की।
उन्होंने आगे कहा कि जैसे सूरत को डायमंड हब कहा जाता है, वैसे ही भावनगर भी अपनी प्रतिभा के कारण एक नया औद्योगिक केंद्र बन सकता है। बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी उद्योग और समाज दोनों की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस पॉलिसी के तहत अब तक 73 से अधिक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है।
इस कॉन्क्लेव में पूर्व प्राध्यापक डॉ. निशीथ देसाई, सुमिटोमो केमिकल्स इंडिया लिमिटेड के जनरल मैनेजर डॉ. संजय वडोदरिया, सौराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष श्री प्रकाशभाई गोर्सिया, CSMCRI के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अरूप घोष, और स्टार्टअप एवं SME इनोवेशन स्पेशलिस्ट श्री जतीन कटारिया जैसे विशेषज्ञों ने बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र की उज्जवल संभावनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
भावनगर रीजनल साइंस सेंटर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. गिरीश गोस्वामी ने भी नई तकनीकों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की शुरुआत में जी.एस.बी.टी.एम. की जॉइंट डायरेक्टर डॉ. स्नेहल बगथरिया ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर उद्योग जगत के कई अग्रणी प्रतिनिधि, शिक्षाविद, और शोधकर्ता उपस्थित रहे।


