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गांधीनगर में गोधरा (कच्छ) के पर्यावरण मित्रों को राज्यस्तरीय सम्मान।

स्थान: गांधीनगर


आज गोधरा (कच्छ) के पर्यावरण मित्रों को गांधीनगर में गुजरात सरकार एवं सद्भावना ट्रस्ट द्वारा सम्मानित किया गया।


“मठो ही कच्छड़े जो पानी…” — पानी और पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण कच्छ का रलियामणु गांव गोधरा, यानी ग्रीन गोधरा है। कच्छी कवि रमणिक सोमेश्वर लिखते हैं—

“कूंपळ फूटे एक ताजी… આપણે તો એટલા મા રાજી।”
मुंबई को कर्मभूमि और मातृभूमि गोधरा–मांडवी (कच्छ) दोनों को समान न्याय देने वाले श्री अरविंदभाई जोशी, श्री चंद्रकांत मोता सहित, कच्छ की श्री कच्छ जिला ग्राम विकास समिति, गोधरा (कच्छ) द्वारा गोधरा क्षेत्र में वर्षों से लगातार किए जा रहे वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मान प्रदान किया गया। इस कार्य में हमवतन सुंदरजीभाई लालजीभाई भेड़ा एवं उनके परिवार का विशेष सहयोग रहा है।


राज्य में इस प्रकार का उल्लेखनीय कार्य करने वाली अग्रणी संस्थाओं एवं कार्यकर्ताओं को गुजरात राज्य सरकार, वन एवं पर्यावरण विभाग, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा सद्भावना वृद्धाश्रम, राजकोट के संयुक्त उपक्रम से राज्य की राजधानी गांधीनगर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।


इस अवसर पर गुजरात राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री अर्जुनभाई मोढवाडिया, ध्रांगध्रा के विधायक श्री प्रकाश वरमोरा, CCF श्री ए. पी. सिंह साहब, GPCB चेयरमैन श्री बारड साहब, मुख्य सचिव श्री ठाकोर साहब तथा सद्भावना वृद्धाश्रम के श्री विजय डाबरिया आदि उपस्थित रहे और उन्होंने संबोधन किया।
मुख्य अतिथियों के करकमलों से संस्थाओं को शील्ड (ट्रॉफी) एवं सम्मान पत्र प्रदान किए गए। पर्यावरण संरक्षण संबंधी कार्यों की सराहना करते हुए संबोधन हुए तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी के पर्यावरण संदेश पर आधारित फिल्म “एक पेड़ मां के नाम” का प्रदर्शन भी किया गया।


श्री कच्छ जिला ग्राम विकास समिति की ओर से मातृभूमि मांडवी के कच्छियों—
श्री नितिनभाई डी. चावड़ा, श्री जी. डी. बलवा (I.R.S.), देवराजभाई, श्री विनोदभाई पंड्या, डोलरभाई कानाणी, दिनेश एल. मांकड और श्री सुनीलभाई घोली (IAS) विशेष रूप से उपस्थित रहे और समिति की ओर से ट्रॉफी एवं सम्मान पत्र स्वीकार किया।
“पर्यावरण संरक्षण ही राष्ट्र संरक्षण है”—इस मंत्र के साथ वृक्षारोपण एवं पर्यावरण क्षेत्र में राष्ट्र को पुनः विश्वगुरु बनाने का संकल्प लिया गया। इस पुण्य कार्य को सर्वत्र से भरपूर सराहना और बधाइयाँ मिल रही हैं।


स्टोरी: रमेशभाई भानुशाली, नलिया, अबडासा, कच्छ

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